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पहली पसंद

सिर्फ एक बार
22 अगस्त 2026 by
Varenya Mishraa
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​मैं किसी की पहली पसंद नहीं हूँ,

न कभी था,

न शायद कभी बन पाऊँगा।


​जब सैलाब में शहर डूबा,

तो नदी ने भी मुझे किनारे थूक दिया;

जब महामारी फैली,

तो मौत ने भी मुझे चुनने से इंकार कर दिया।


बचपन से बुढ़ापे तक

बस एक ही टीस साथ चलेगी—

काश! किसी एक जगह, किसी एक पल,

मैं भी किसी की पहली पसंद होता।

                   


में कविता
Varenya Mishraa 22 अगस्त 2026
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