Varenya Mishraa पहली पसंद मैं किसी की पहली पसंद नहीं हूँ, न कभी था, न शायद कभी बन पाऊँगा। जब सैलाब में शहर डूबा, तो नदी ने भी मुझे किनारे थूक दिया; जब महामारी फैली, तो मौत ने भी मुझे चुनने से इंकार कर दिया। बचपन से बुढ़ापे त... 22 अग॰ 2026 कविता
Varenya Mishraa अचानक अंत - Achanak Ant पहचान खोने के सन्नाटे से लेकर देवलोक के साक्षात्कार तक—'सूर्य का बेटा' आत्म-विस्मृति और अलौकिक बोध के रहस्य को उजागर करती एक अद्वितीय हिंदी कविता है। 21 अग॰ 2026 कविता
Varenya Mishraa बेकार सवाल - Bekar Sawal क्यों माता-पिता ये भूल जाते है की उनके झगड़े का बच्चों पर क्या असर होता है । इस कविता के माध्यम से मैंने यही बताने की कोशिस की है । 21 अग॰ 2026 कविता