मैं किसी की पहली पसंद नहीं हूँ,
न कभी था,
न शायद कभी बन पाऊँगा।
जब सैलाब में शहर डूबा,
तो नदी ने भी मुझे किनारे थूक दिया;
जब महामारी फैली,
तो मौत ने भी मुझे चुनने से इंकार कर दिया।
बचपन से बुढ़ापे तक
बस एक ही टीस साथ चलेगी—
काश! किसी एक जगह, किसी एक पल,
मैं भी किसी की पहली पसंद होता।