Skip to Content

अचानक अंत - Achanak Ant

आखिरी सफर
21 अगस्त 2026 by
Varenya Mishraa
| No comments yet
एक काली वाहन मे कहीं जा रहा था मैं
ठोकरे लगती, मैं हिलता गिरता
मुझे कुछ याद नहीं था
मेरा नाम, मेरा धर्म, मेरा परिवार
ढूंढ रहा था दिल मे
तब ही वाहन लगी आसमान चीरने
मैंने चालक को थामा

कह रहा था देवलोक से सूर्य का बेटा हूँ । 

                                 -वरेण्य मिश्रा 

में कविता
Varenya Mishraa 21 अगस्त 2026
Share this post
संग्रहित करें
बेकार सवाल - Bekar Sawal
बेतुके सवाल और तनाव