एक काली वाहन मे कहीं जा रहा था मैं
ठोकरे लगती, मैं हिलता गिरता
मुझे कुछ याद नहीं था
मेरा नाम, मेरा धर्म, मेरा परिवार
ढूंढ रहा था दिल मे
तब ही वाहन लगी आसमान चीरने
मैंने चालक को थामा
कह रहा था देवलोक से सूर्य का बेटा हूँ ।
-वरेण्य मिश्रा